👉 आदिकाल और भाक्तिकाल के संधि कवि- विद्यापति 👉भाक्तिकाल और रीतिकाल के सन्धि कवि जगन्नाथ दास रत्नाकर 👉भाक्तिकाल और आधुनिक काल के सन्धि कवि सत्यनारायण 👉 आधुनिक युग और द...
शब्द सम्राट कोश किसे कहा जाता है? बाबू श्यामसुन्दर दास को 👉हिन्दी का टेनिस किसे कहा जाता है? जगन्नाथ दास 👉आधुनिक रहिम किसे कहते है? मिर्जा नासिर हसन 👉हिन्दी साहित्य का मह...
👉किस रचनाकार को 'कृषक संस्कृति का प्रमुख गायक कहा गया है ? प्रेमचन्द 👉आधुनिक हिन्दी मे कौनसी विधा को बोध कथा के रूप में जाना जाता है? लघुकथा 👉हिन्दी साहित्य में किस रचनाका...
👉द्वाभा-प्रभाकर माचवे 👉शह और मात -राजेन्द्र यादव 👉अपने अपने अजनवी-अज्ञेय 👉जयवर्धन-जैनेन्द्र 👉अजय की डायरी-देवराज उपाध्याय 👉मुन्नी की डायरी-प्रसन्न राय पत्रात्मक श...
👉प्रेत बोलते है- प्रेम और असफल दाम्पत्य -जीवन का चित्रण हुआ है। 👉सारा आकाश - प्रेत बोलते है उपन्यास का नया नामकरण 👉दिल्ली दूर है- धार्मिक और सांस्कृतिक मतभेदों क समन्वय की ...
भाग्यवती - किस्सागो शैली निस्सहाय हिन्दू - नाटकीय शैली श्यामा स्वप्न - स्वप्न शैली प्रणयिनी परिणय- गद्यकथा की अलंकृत शैली वे दिन - अस्तित्ववादी शैली बाबा बटेसर नाथ - फंटेसी ...
👉उपमा का बादशाह- देव 👉विरोधाभास का बादशाह - घनानन्द 👉हेतुत्प्रेक्षा का बादशाह - जायसीं 👉रूपकों का बादशाह - तुलसी 👉अनुप्रास का बादशाह- तुलसी 👉उत्प्रेक्षा का बादशाह - तुल...
अभिमान से संबंधित कथन:- अभिमान एक व्यक्तिगत गुण है,उसे समाज के भिन्न भिन्न विषयों से जोड़ना ठीक नहीं। मनोवेग वर्जित सदाचार दम्भ या झूठी कवायद ह। अभिमान हर घड़ी बड़ाई की भावना भोगने का दुर्व्यसन है। भय से सम्बंधित कथन:- भय के लिए कारण का निर्दिष्ट होना जरूरी नही भय जब स्भावगत हो जाता है , कायरता या भीरूता कहलाता ह्। भय का फल भय के संचार काल तक ही रहता ह। क्रोध दुःख के कारण पर प्रभाव डालने के लिए आकुल करता है और भय उसकी पंहुच से बाहर होने के लिए। उत्साह के विषय में कथन:- कर्म सौन्दर्य के उपासक ही सच्चे उत्साही कहलाते हैं। दुःख वर्ग में जो स्थान भय का है, वही स्थान आनन्द वर्ग में उत्साह का है। उत्साह वास्तव में कर्म और फल की मिली -जुली अनुभूति है। साहसपूर्ण आनन्द की उमंग का नाम उत्साह है। घृणा से संबंधित कथन :- घृणा के बदले में तो घृणा ,क्रोध या वैर होता है। घृणा और भय की प्रवृति एक सी है। वैर का आधार व्याक्तिगत होता है, घृणा का सार्वजनिक। अपने बनाने और पालने वाले से बैर पालना कृतघ्नता ह्। सभ्यता या शिष्टता के व्यवहार में घृणा उदासीनत...
👉भक्तिकाल लोक जागरण काल है- रामविलास शर्मा 👉भक्ति आन्दोलन लोकजागरण है- हजारी प्रसाद द्विवेदी। 👉भक्ति द्रविड़ उपजी लाये रामानन्द प्रकट किया कबीर न,सात दीप नौ खंड-कबीर। ...
👉कबीर की भाषा हिन्दुस्तानी तथा ब्रजभाषा का मिश्रित रूप है।:- सुनीती कुमार च ट र् जी 👉कबीर की भाषा राजस्थानी है एवं कबीर को उ सी प्र कार राजस्थानी कवि कहा जा सकता है जिस प्रक...
👉जन्म-1875 👉मृत्यु-1947 👉जन्म स्थान-मध्य प्रदेश रचनाएं:- 👉व्याकरण-हिन्दीव्याकरण (1920) प्रकाशन-काशी नागरी प्रचारिणी सभा से। 👉नाटक- पद्य पुष्पावली, हिन्दुस्तानी शिष्टाचार तथा सु...
👉नागार्जुन की प्रसिद्ध कविताएं :- बादल को घिरते देखा है, पाषाणी, चन्दना, रविन्द्र के प्रति, सिंदूर तिलकित भाल, तुम्हारी तंदुरित मुस्कान, ओ जन मन के सजग चितेरे, गुलाबी चूड़िया...
जन्म-1911 मृत्यु-1998 जन्म स्थान-तैरानी ,दखभंगा बिहार वास्तविक नाम-वैद्यनाथ मिश्र यह प्रयोगशील और प्रगतिशील दानों रूपों में प्रसिद्ध हैं। इनकी रचनाओं में विषय की विविधता देखने को मिलती है। इनकी रचनाओं में व्यंग्य ,आक्रोश,राजनीतिक स्थितियों ,किसान-मजदूर और रागात्मकता भी मिलती है। इन्होने हिन्दी और मैथिली दोनो भाषाओं में रचना की है। मैथिली में ये "यात्री" नाम से लिखते थे। बौद्ध धर्म से दीक्षा लेकर नागार्जुन नाम ग्रहण किया। 'बाबूजी' नाम से शोभाकान्त ने इनकी जवनी लिखी है। इन्होने ' दीपक पत्रिका का सम्पादन किया । , 'एक व्याक्ति एक युग' इनकी आलोचना कृति है। "मेघदूत का हिन्दी रूपान्तरण "(1955)इनकी अनुदित रचना है। पुरस्कार:- "पत्र हीन नग्न गाछ "मैथिल रचना पर साहित्य अकादमी पुरस्कार । उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा भारत भारती पुरस्कार मध्य प्रदेश सरकार द्वारा1993में मैथिलीशरण गुप्त सम्मान । बिहार सरकार द्वारा राजेन्द्र शिखा सम्मान । हिन्दी आकादमी पश्चिम बंगाल दारा 1995 में राहुल सम्मान मिला । इनका एकमात्र नाटक ...
👉जन्म-इनके जन्म के विषय में मतभेद हैं। शयामसुन्दर दास ,प्रभु दयाल मितल और कंठमणि शास्त्री के अनुसार सं. 1590 👉गुलाब राय तथा गोगुल नाथ ने इन्हें तुलसी का भाई माना ह। गुलाब राय ...
👉पहली बार बारहमासा वर्णन मिलता है -नेमिनाथ चऊपई में। 👉हिन्दी में पहली बार बारहमासा वर्णन मिलता है-बीसलदेव रासो में। 👉हिन्दी में पहली बार व्यापक ढंग का बारहमासा मिलता ह...
👉ट्रिक:- परम योग पाकर रिठनेमि नाग महापुराण भविष्यत का दोहा ढ़ोल बजाकर उपदेश देते हुए सन्देश प्राप्त करता है। 👉परम-परमात्मा प्रकाश-जोइन्दु -6ठी शताब्दी 👉योग-योगसार -जोइन्द...
👉नन्दुलारे वाजपेयी की आलोचनाएं:- हिन्दी साहित्य 20वीं शताब्दी-1942(प्रथम कृति निबन्ध सग्रह) जय शंकर प्रसाद-1939ई० प्रेमचन्द -1950ई० आधुनिक साहित्य-1950 महाकवि सूरदास -1952 महाकवि निराला-1965 न...
नन्ददुलारे वाजपेयी-1906-1967ई० 👉वाजपेयी जी की समीक्षा शैली व्याख्यात्मक और विवेचनात्मक है। 👉गणपति चन्द्र गुप्त ने इन्हें अपने युग का सजग समीक्षक कहा है। 👉वाजपेयी जी किसी व...
रामचन्द्र शुक्ल- 1884 ई बाबू गुलाब राय- 1888 ई नन्ददुलारे बाजपेयी-1906ई. हजारी प्रसाद द्विवेदी- 1907ई. रामधारी सिंह दिनकर-1908ई. ट्रिक:- शुक्ल बाबू में वाजपेयी से हजार दिन मांगें। 👇👇 रामाविला...
👉पृथ्वीराज रासो के रचनाकार -चन्दबरदाई 👉पृथ्वीराज रासो के चार संस्करण मिलते हैं। 👉पृथ्वीराज रासो के इधर उधर लघु संस्करण का संकलन चन्द्रसिंह ने तथा वृहत्त संस्करण का स...