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परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण डायरी शैली तथा पत्रात्मक शैली में लिखे गए उपन्यास

👉द्वाभा-प्रभाकर माचवे 👉शह और मात -राजेन्द्र यादव 👉अपने अपने अजनवी-अज्ञेय 👉जयवर्धन-जैनेन्द्र 👉अजय की डायरी-देवराज उपाध्याय 👉मुन्नी की डायरी-प्रसन्न राय पत्रात्मक श...

नेट के लिए महत्वपूर्ण उपन्यासों के विषय

👉प्रेत बोलते है- प्रेम और असफल दाम्पत्य -जीवन का चित्रण हुआ है। 👉सारा आकाश - प्रेत बोलते है उपन्यास का नया नामकरण 👉दिल्ली दूर है- धार्मिक और सांस्कृतिक मतभेदों क समन्वय की ...

एन टी ए नेट की दृष्टि से अति महत्वपूर्ण प्रमुख उपन्यासों की शैली

भाग्यवती - किस्सागो शैली निस्सहाय हिन्दू - नाटकीय शैली श्यामा स्वप्न - स्वप्न शैली प्रणयिनी परिणय- गद्यकथा की अलंकृत शैली वे दिन - अस्तित्ववादी शैली बाबा बटेसर नाथ - फंटेसी ...

परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण उपाधियां

👉उपमा का बादशाह- देव 👉विरोधाभास का बादशाह - घनानन्द 👉हेतुत्प्रेक्षा का बादशाह - जायसीं 👉रूपकों का बादशाह - तुलसी 👉अनुप्रास का बादशाह- तुलसी 👉उत्प्रेक्षा का बादशाह - तुल...

महत्वपूर्ण कथन रामचन्द्र शुक्ल के निबन्ध संग्रह चिन्तामणि

अभिमान से संबंधित कथन:- अभिमान एक व्यक्तिगत गुण है,उसे समाज के भिन्न भिन्न विषयों से जोड़ना ठीक नहीं। मनोवेग वर्जित सदाचार दम्भ या झूठी कवायद ह। अभिमान हर घड़ी बड़ाई की भावना भोगने का दुर्व्यसन है। भय से सम्बंधित कथन:- भय के लिए कारण का निर्दिष्ट होना जरूरी नही भय जब स्भावगत हो जाता है , कायरता या भीरूता कहलाता ह्। भय का फल भय के संचार काल तक ही रहता ह। क्रोध दुःख के कारण पर प्रभाव डालने के लिए आकुल करता है और भय उसकी पंहुच से बाहर होने के लिए। उत्साह के विषय में कथन:- कर्म सौन्दर्य के उपासक ही सच्चे उत्साही कहलाते हैं। दुःख वर्ग में जो स्थान भय का है, वही स्थान आनन्द वर्ग में उत्साह का है।  उत्साह वास्तव में कर्म और फल की मिली -जुली अनुभूति है। साहसपूर्ण आनन्द की उमंग का नाम उत्साह है। घृणा से संबंधित कथन :- घृणा के बदले में तो घृणा ,क्रोध या वैर होता है। घृणा और भय की प्रवृति एक सी है। वैर का आधार व्याक्तिगत होता है, घृणा का सार्वजनिक। अपने बनाने और पालने वाले से बैर पालना कृतघ्नता ह्। सभ्यता या शिष्टता के व्यवहार में घृणा उदासीनत...

परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं और हम अकसर गलत उत्तर देते है।

श्रृंगार तिलक-रूद्रभट श्रृंगार प्रकाश-भोजराज श्रृंगार शिरोमणि -प्रतापसाही श्रृंगार मंजरी-प्रतापसाही श्रृंगार मंजरी -यशवंत सिंह श्रृंगार मंजरी -चिन्तामणि श्रृंगार रस माधुरी -कृष्ण भट्ट देव ऋषि श्रृंगार सोरठा -रहीम श्रृंगार बत्तीसी -द्विज देव श्रृंगार लतिका -द्विज देव श्रृंगार चालिसा -द्विज देव श्रृंगार निर्णय -भोजराज श्रृंगार भूषण -बेनी प्रवीन श्रृंगार विलास -सोमनाथ श्रृंगार सागर -मोहनलाल मिश्र

भाक्तिकाल के विषय में विद्वानों के महत्वपूर्ण कथन

👉भक्तिकाल लोक जागरण काल है-  रामविलास शर्मा 👉भक्ति आन्दोलन लोकजागरण है- हजारी प्रसाद द्विवेदी। 👉भक्ति द्रविड़ उपजी लाये रामानन्द प्रकट किया कबीर न,सात दीप नौ खंड-कबीर। ...